किशनगंज की आवाज़ के बारे में…

अपना किशनगंज आवाज स्पेशल

मीडिया क्या था और अब क्या बन चुका हैं. आज के दौर के अधिकांश मीडिया संस्थान कॉरपोरेट घरानों द्वारा चलाए जा रहे है या किसी की पारिवारिक विरासत बन चुके हैं। मीडिया संस्थानों में पत्रकार ही हाशिये पर चले गए है. कंटेंट के फैसलों, खबरों के प्रस्तुतिकरण जैसे मुद्दों पर आर्थिक नफ़ा-नुकसान देखकर फैसले लिए जा रहे हैं. पत्रकारिता व्यापार का रूप ले रही है. संपादक से संवाददाता तक मीडिया हाउस के मैनेजमेंट के इशारों पर नाचने लगे है.

ऐसे में, सीमित संसाधनों के साथ ही सही, हमने फिर से जनसरोकार की पत्रकारिता की शुरुआत की हैं. हम विश्वास दिलाते है कि संपादक और पत्रकारों की नियुक्ति, खबरों की कवरेज जैसे फैसले पत्रकारिता के हित को ध्यान में रखकर लेंगे न कि संस्थान मालिक या किसी नेता या विज्ञापनदाता के हितों को ध्यान में रखकर. हम अपने संपादकों और पत्रकारों को अपनी आवाज में अपनी बात कहने की पूरी आजादी देने का प्रयास करेंगे. यह आज़ादी हमारे पाठको को भी होगी.

बदलते समेत के साथ पत्रकारिता का स्तर नीचे जा रहा है

पत्रकारिता में कई गलत प्रचलन सामने आ रहे हैं, जैसे खबरों को मूल्यों को ताक पर रखकर गलत तरीके से संपादित करना, पेड न्यूज, निजी संबंधों के लाभ के लिए कुछ खबरों को चलाना, पत्रकारिता की आड़ में व्यापारिक समझौते करना आदि.

हम यह भी विश्वास दिलाना चाहते है कि कोई भी महत्वपूर्ण ख़बर जो लीपापोती के कारण पाठक तक पहुंचती ही नहीं, दबा दी जाती हैं, क्योंकि मीडिया संस्थान उन्हें किसी व्यक्ति या संस्था विशेष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से सामने लाना ही नहीं चाहते. जनता भी ये सब समझने लगी हैं. पाठको का मीडिया पर विश्वास कम हो रहा है. पाठक पत्रकार को भी समझता है, पत्रकारिता को भी. हम पाठको के पत्रकारिता पर विश्वास को दोबारा बहाल करने का प्रयास करेंगे.

‘किशनगंज की आवाज़’ के अस्तित्व में आने की मुख्य वजह यही हैं. अगर पत्रकारिता को बचाए रखना है तो इसे पूरी संपादकीय और आर्थिक स्वतंत्रता देनी ही होगी. और इसका एक ही रास्ता है कि पाठक को इसमें भागीदार बनना होगा. जो पाठक वास्तविक पत्रकारिता बचाए रखना चाहते हैं, बेखौफ और निडर अंदाज़ से की गई कोशिशों को कामयाब होते देखना चाहते है, सच तक पहुंचना चाहते हैं.

सत्यान्वेषी पत्रकारिता के इस उद्देश्य की तरफ ये हमारा छोटा ही सही लेकिन एक महत्वपूर्ण कदम है. इस रास्ते के सफर में सिर्फ एक ही बाधा है- जरूरी संसाधनों की अनुपलब्धता. हम फिर से विश्वास दिलाते है कि सीमित संसाधनों को सच की राह में रोड़ा नही बनने देंगे. हमारी पाठकों से बस इतनी गुजारिश है कि हमें ज़रूर पढ़ें, दूसरो को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करे, इसके अलावा हमे और बेहतर करने के लिए प्रेरणा और सुझाव दें ।

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