ईद मिलाद-उन-नबी के लिए सजा शहर, निकला जुलुस ए मोहम्मदी

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नितेश वत्स। ठाकुरगंज

मुस्लिम समुदाय ने इस्लाम के संस्थापक पैगम्बर मोहम्मद साहब का जन्मदिन ईद-ए-मिलाद-उन-नबी का पर्व बुधवार को धूम-धाम से मनाया। इसके चलते जहां मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में जुलूस निकाले गए, वहीं गरीबों को जरूरतमंद जरूरत की वस्तुएं बांटकर मदद की गई। शहर के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में कई धार्मिक आयोजन भी हुए। मिलाद-उन-नबी के मौके पर घरों और मस्जिदों में कुरआन ख्वानी, फातिहा ख्वानी व नात ख्वानी हुई। मस्जिदों, घरों व मुहल्लों को फूल, समेत रंग-बिरंगी रौशनी के बल्ब, झंडों, गुब्बारों और झंडियों से सजाया गया। ठाकुरगंज प्रखंड के विभीन्न ग्राम-पंचायतों से लोगो की टोलियां जुलुस की शक्ल लेकर नगर भ्रमण किया। मरकज़ी जामा मस्जिद के आस-पास उत्सवी माहौल व्याप्त था।

मरकज़ी ज़ामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना अब्बास ने कहा कि आज हम लोग नबी की आमद का जश्न मना रहे हैं, जिसकी आमद की ख़ुशी इंसान ही नहीं बल्कि फरिश्तों ने भी मनाई थी, जिन्होंने मर्द-औरत, बेटा-बेटी और गुलाम मालिक को बराबरी का दर्जा दिया। आपने औरतों को उनका हक दिलाया और शराब जैसी सामाजिक बुराइयों को हराम करार दिया।

ठाकुरगंज विधायक नौशाद आलम ने कहा कि पैगम्बर मोहम्मद ने दुनिया को अमन का पैग़ाम दिया। पैगंबर मोहम्मद साहब का जीवन अनुशासन की भी शिक्षा देता हैं। वे कभी अकेले नहीं खाते थे। वह दूसरों को आमंत्रित करके फिर उनके साथ खाना खाया करते थे। वह अपने कपड़े खुद ही सिलते थे, अपने जूते की मरम्मत और फर्श पर झाडू वगैरह भी खुद ही करते थे।

ठाकुरगंज नूरी मस्जिद के इमाम मौलाना अब्दुल शकूर ने कहा कि पैगम्बर मोहम्मद ने अमन का पैग़ाम दिया और समाज की बुराइयों को मिटाने की शिक्षा दी। इस अवसर पर अहमद हुसैन, ग़ुलाम हसनैन, गोपाल धानुका, निज़ाम, मुश्ताक़ आलम, नसीम खान, ज़फिर, मुमताज़ आलम आदि लोग उपस्थित थे।

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